सुबह देर तक क्यों नहीं सोना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Mon 5th Dec 2022 : 10:36

देर तक सोना, देर से सोना, देर से खाना ऐसे रोगों को बुलाएगा

क्यों है यह अहम? यह तथ्य समझ लीजिए - 
आप जितने बजे खाना खाएंगे, उसके दो - तीन घंटे बाद आपके शरीर में ग्लूकोज़ का स्तर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचेगा। उसे नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का स्राव पैनक्रियाज़ द्वारा होगा, जो धीमे-धीमे ग्लूकोज़ के स्तर के कम करेगा। यानी रात 9 बजे खाना खाया, तो 11-12 बजे के बीच ग्लूकोज़ उच्चतम होकर, फिर इंसुलिन से नियंत्रित होते हुए सुबह 3-4 बजे के बीच कम या सामान्य स्तर पर आएगा। इस समय कुछ न खाया और ग्लूकोज़ की भरपाई नहीं की, तो बहुत सारी समस्याएं सिर उठाने लगेंगी।

 क्या होगा? 
इंसुलिन विरोधी हार्मोन ग्लूकोगॉन हरकत में आ जाता है और लीवर में संचित ग्लायकोजन को तोड़कर फिर शुगर बनाने लगता है, जो शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। 

हो क्या रहा है?
आजकल खाना 11 के बाद होता है, सोना 12 के बाद। यानी ग्लूकोज़ पीक लेवल पर आता है 3 बजे तक और इंसुलिन के नियंत्रण के बाद कम होते-होते सुबह 8-9 बज जाते हैं। देर से सोए इंसान को भूख लगती रहती है, वह नींद पूरी करने के चक्कर में दस बजे तक सोया रहता है। पैनक्रियाज़ इंसुलिन स्रावित कर-करके, शुगर संतुलित करके थकने लगता है। नतीजतन, ग्लूकोज़ कम हो जाता है। 

 

क्या सही है 

रात का भोजन 8-9 के बीच कर लें। दस-साढ़े दस तक सो जाएं। 
सुबह 5-6 के बीच उठें और एक कप चाय या शहद-नींबू पानी या एक फल खाकर टहलने जाएं। 
7-8 के बीच नाश्ता करें। सुबह का नाश्ता 20-30% प्रोटीन, 50-60% कार्बोहाइड्रेट और 10-15% फैट का हो। इसमें रेशे व खनिज (फल) ज़रूर शामिल करें। 


मधुमेह ही ख़तरा नहीं 
सोने-जागने के नियमों में गड़बड़ी से फेफड़ों, पेट, लीवर और आंतों सब पर बुरा प्रभाव पड़ता है। पैनक्रियाज़ ही नहीं, लीवर, फेफड़े भी सुस्त होने लगते हैं। लिहाज़ा भूख कम हो जाती है। 

जब ख़ाली पेट एसिड से भरने लगता है और जलन के मारे भूख बहुत कम हो जाती है। इससे सुबह उठते वक़्त सिर में दर्द, भारीपन, पेट में जलन, जी मिचलाना, चिड़चिड़ापन,दिन में उनींदापन, एकाग्रता में कमी, भूख न लगना जैसी तकलीफें अगर आपको भी महसूस होती हों, तो एक बार अपनी सोने-जागने और खाने-पीने की आदतों पर नज़र ज़रूर डाल लें। 
बिगड़ी दिनचर्या के परिणामस्वरूप फैटी लीवर, फैटी पैनक्रियाज़, दिल के रोग, मोटापा, पाचन की शक्ति का कम हो जाना, अवसाद जैसे कई रोग हो सकते हैं। अस्वस्थ महसूस करने से चिड़चिड़ाहट भी होने लगती है। दफ़्तर में काम करने वाले एकाग्रता में कमी की शिक़ायत करते हैं। 
सबसे अहम बात यह है कि यह वे रोग हैं, जिन्हें बड़ी आसानी से दूर रखा जा सकता है, लेकिन दिनचर्या की गड़बड़ी इन्हें सहज ही न्यौता दे बैठती है। 

पांच मंत्र 

ठीक समय पर सोना और 7-8 घंटे की नियमित नींद ज़रूर लें। 
40 मिनट की वॉक या आधे घंटे का व्यायाम (हफ्ते में तीन बार 30-40 मिनट की वॉक भी पर्याप्त है।) 
फास्ट फूड से परहेज़ रखें। 
संतुलित आहार तथा दिन में 3-4 लीटर पानी का सेवन करें। 
आहार में फलों और सलाद का भरपूर समावेश होना चाहिए। 


आयुर्वेद में कहा है... 
जो खाने के समय का ध्यान रखा जाए, तो मेटाबॉलिज़म दुरुस्त रहता है और जीवनशैली से जुड़े रोग दूर रहते हैं। नियमन शरीर को स्वस्थ रखता है। रात की गहरी नींद भी आवश्यक है। प्रात: ही स्नान कर लें। यह प्रमाणित है कि स्नान करते ही भूख खुलकर लगती है। इस समय संतुलित व पोषणयुक्त आहार लेना दिन की बेहतरीन शुरुआत होगी। 

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